🧠 Sophia है कौन?
Sophia को Hanson Robotics (हॉन्गकॉन्ग स्थित कंपनी) ने 2016 में विकसित किया था। इस रोबोट को इंसानों की तरह बोलने, भावनाएँ दर्शाने और बातचीत करने के लिए बनाया गया है। Sophia का चेहरा एक इंसानी महिला की तरह दिखता है और उसके हाव-भाव, आँखों की हरकत, चेहरे की मुस्कान बिलकुल मनुष्य जैसी लगती है।
🔍 Sophia की ख़ासियतें
Sophia के चेहरे में 60 से ज्यादा अलग-अलग हाव-भाव दिखाने की क्षमता है।
Sophia में Natural Language Processing (NLP) तकनीक का इस्तेमाल हुआ है जिससे यह सवालों के जवाब दे सकती है।
यह रोबोट हर बातचीत से सीखता है और बेहतर बनता जाता है।
Sophia इंटरनेट से जुड़कर दुनियाभर की जानकारी प्राप्त कर सकता है।
2017 में सऊदी अरब ने Sophia को नागरिकता (Citizenship) प्रदान की, जिससे यह दुनिया का पहला रोबोट बन गया जिसे किसी देश की नागरिकता मिली। यह एक ऐतिहासिक और थोड़ा विवादित निर्णय भी था, लेकिन इससे यह साफ हुआ कि भविष्य में रोबोट्स को समाज का हिस्सा माना जाएगा।
🧭 Sophia का उद्देश्य क्या है?
Sophia का मुख्य उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्राहकों से जुड़ी सेवाओं में लोगों की मदद करना है। इसके अलावा यह तकनीकी प्रदर्शन और AI रिसर्च के लिए भी उपयोग की जाती है।
🤖 क्या भविष्य में हर घर में Sophia जैसा रोबोट होगा?
आज भले ही Sophia एक हाई-एंड प्रयोगात्मक रोबोट हो, लेकिन आने वाले समय में ह्यूमनॉइड रोबोट्स का उपयोग --
• घरों में सहायक के रूप में,
• स्कूलों में एजुकेटर के रूप में,
• बुजुर्गों की देखभाल में,
• और बिज़नेस में क्लाइंट इंटरफेस के रूप में किया जा सकता है।
⚖️ क्या हैं चुनौतियाँ?
Sophia जैसे रोबोट्स को लेकर कुछ सवाल और चिंताएँ भी हैं:
• AI का नैतिक पक्ष (Ethics): क्या रोबोट्स को अधिकार मिलना चाहिए?
• प्राइवेसी: AI से हमारी जानकारियाँ कितनी सुरक्षित हैं?
• जॉब्स पर असर: क्या ये इंसानों की नौकरियाँ छीन लेंगे?
🔚 निष्कर्ष
Sophia एक झलक है उस भविष्य की, जहाँ इंसान और मशीन मिलकर काम करेंगे। ये न सिर्फ विज्ञान की एक चमत्कारी उपलब्धि है, बल्कि समाज में AI की भूमिका को लेकर चल रही बहस का भी केंद्र बन चुकी है।
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