पीछे मुड़कर होती है बातचीत – इस गांव की परंपरा आपको चौंका देगी

पीछे मुड़कर होती है बातचीत


दुनिया में हर कोने में कोई न कोई अनोखी परंपरा ज़रूर देखने को मिलती है, जो हमें चौंकाती भी है और सोचने पर भी मजबूर करती है। ऐसी ही एक विचित्र परंपरा निभाई जाती है इंडोनेशिया के एक छोटे से गांव "कंपुंग तरबालिक" (Kampung Terbalik) में, जहाँ के लोग आमने-सामने बैठकर या देख कर बात करने के बजाय एक ही दिशा में मुड़कर, पीठ करके बातचीत करते हैं।

📜 परंपरा की शुरुआत कैसे हुई?

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, कई साल पहले गांव में कुछ बड़े पारिवारिक विवाद हुए थे, जिन्होंने समाज को दो हिस्सों में बाँट दिया। इसके बाद लोगों ने आपसी तनाव को कम करने के लिए एक नई परंपरा शुरू की --

"जब आमने-सामने बात करना टकराव को बढ़ाता है, तो पीठ करके बात करने से दिलों में शांति बनी रहती है।"

धीरे-धीरे यह चलन गांव की संस्कृति का हिस्सा बन गया। आज यह न केवल एक परंपरा है, बल्कि इस गांव की पहचान भी है।

🚶 कैसे होती है बातचीत?

यह परंपरा सुनने में जितनी अजीब लगती है, असल में उतनी ही दिलचस्प है:

  • गांव के लोग साथ-साथ एक ही दिशा में चलते हुए बात करते हैं, लेकिन एक-दूसरे की तरफ मुड़कर नहीं देखते।
  • अगर किसी बैठक या सभा में बातचीत हो रही हो, तो वे आमने-सामने बैठने के बजाय पीठ करके या एक ही दिशा में बैठते हैं।
  • कुछ स्थानों पर बातचीत के दौरान दर्पण का उपयोग भी किया जाता है ताकि चेहरा देखे बिना संवाद बना रहे।
  • यह परंपरा बचपन से ही बच्चों को सिखाई जाती है, ताकि संस्कृति की यह अनोखी पहचान बनी रहे।

🤔 तर्क है या अंधविश्वास?

हममें से कई लोगों को यह तरीका अटपटा लग सकता है, लेकिन इस गांव के लोगों का मानना है कि आमने-सामने बात करने से अहंकार, गुस्सा और टकराव बढ़ सकता है, जबकि पीठ करके बातचीत करने से भावनाएं संयमित रहती हैं और रिश्तों में मिठास बनी रहती है।

🌍 पर्यटन का केंद्र बनता गांव

इस अनोखी परंपरा ने गांव को पूरी दुनिया में प्रसिद्ध कर दिया है। कई यूट्यूब व्लॉगर्स, डॉक्युमेंट्री निर्माता और पर्यटक इस गांव का दौरा कर चुके हैं। स्थानीय प्रशासन भी अब इस अनोखी विरासत को संस्कृति-पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रहा है।

🔍 क्या हमें कुछ सीख मिलती है?

इस गांव की परंपरा हमें यह सिखाती है कि हर संवाद केवल आँखों में आँखें डालकर नहीं होता।

कभी-कभी दूरी और संयम से कही गई बात, सीधे बोले गए कठोर शब्दों से ज्यादा असरदार होती है।

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